मनोवैज्ञानिक तरीके से समस्या-समाधान
अंधविश्वास से बचने के लिए तर्कशील बनने का आह्वान
अंधविश्वास से बचने के लिए तर्कशील बनने का आह्वान
तर्कशील सोसायटी के सदस्यों ने घड़साना तहसील के चक क्० एनडी में मनोवैज्ञानिक तरीके से समस्या का समाधान किया। सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी ने बताया कि इस प्रकार की घटनाएं महज एक मानवीय शरारत होती हैं।
यह रहा घटनाक्रम :
चक 10 एनडी के निवासी इंद्राज जाखड़ के परिवार में पुत्र सुनील को गत एक महीने से अचानक ही अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देतीं और खाळे के आस-पास किसी के चलने का आभास होता। इसके कुछ दिनों पश्चात् घर के कमरे का दरवाजा अचानक ही तेज आवाज के साथ खुलना, सुनील का अचानक 5 फीट ऊंचा उठकर नीचे गिरना, उसकी पेंट पर, हाथों, बाजू और छाती पर लाल रंग के निशान बनना जैसी घटनाएं भी शुरू हो गईं। मटके में पानी का रंग भी लाल मिला। घर के मुख्य दरवाजे पर भी लाल रंग के निशान मिलना शुरू हो गए। परिवार के सदस्य घटनाओं से परेशान होकर पास ही के चक में कम्प्यूटर पर दिनमान देखने वाले ज्योतिष के पास गए, जिसने जन्म-पत्री देखकर सन् 2013 तक इसका पक्का इलाज करने की बात कही। वहां से लौटने के कुछ ही दिनों बाद घर में एक लिखा हुआ कागज का टुकड़ा मिला। कागज पर लिखी इबारत को पढ़कर परिवार के सदस्य सकते मे आ गए। एक दिन अचानक ही घर में पत्थर आकर गिरा और घर में पड़ा लाल रंग गायब मिला।
तत्पश्चात परिवारजन एक तांत्रिक महिला से मिले तथा उसे पूरी घटना से अवगत करवाया। महिला ने मंत्र-तंत्र से घर में जोत जलाई और पूरे घर में पानी के छींटे दिए। अजीबोगरीब घटनाओं का दौर चलता रहा तो परेशान परिजनों ने तांत्रिक महिला को फिर से बुलाया जिसने सुनील को उसके ननिहाल सुरजनसर भेज दिया। 12 दिन तक ननिहाल में किसी भी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई, परन्तु 13वें दिन मामा के घर में अचानक थालियां बरसनी शुरू हो गईं। जिस पर हर बार कुछ-न-कुछ लिखा होता था। ये घटनाएं आम होती चली गईं तो इन्होंने झाड़-फूंक करने वाले को इलाज के लिए बुलाया तो वह उसकी हरकतें देखकर घबराकर भाग गया। इसके बाद घर में आग लगनी शुरू हो गई।
जब घटनाएं दिन-ब-दिन घटनाएं बढ़ने लगी तो विचलित परिवारजनों ने तर्कशील सोसायटी से संपर्क किया। सोसायटी के सदस्यों ने वहां जाकर जब गहन पूछताछ की तो बात समझते देर ना लगी। सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी और सदस्यों ने इस घटना को एक मानवीय शरारत करार दिया तथा अंधविश्वास निवारण के लिए तर्कशील बनने का आह्वान किया है। चक 10 एन.डी. के इंद्राज, सुनील, कृष्ण, रेंवताराम, रोशन तथा महेन्द्र ने सोसायटी के राममूर्ति स्वामी, विनोद स्वामी, लीलाधर सहू, अजय परलीका, आत्माराम स्वामी, महेन्द्र सिंह, शंकरलाल, संतलाल, रामकुमार तथा दलीप सहू का आभार व्यक्त किया।
तत्पश्चात परिवारजन एक तांत्रिक महिला से मिले तथा उसे पूरी घटना से अवगत करवाया। महिला ने मंत्र-तंत्र से घर में जोत जलाई और पूरे घर में पानी के छींटे दिए। अजीबोगरीब घटनाओं का दौर चलता रहा तो परेशान परिजनों ने तांत्रिक महिला को फिर से बुलाया जिसने सुनील को उसके ननिहाल सुरजनसर भेज दिया। 12 दिन तक ननिहाल में किसी भी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई, परन्तु 13वें दिन मामा के घर में अचानक थालियां बरसनी शुरू हो गईं। जिस पर हर बार कुछ-न-कुछ लिखा होता था। ये घटनाएं आम होती चली गईं तो इन्होंने झाड़-फूंक करने वाले को इलाज के लिए बुलाया तो वह उसकी हरकतें देखकर घबराकर भाग गया। इसके बाद घर में आग लगनी शुरू हो गई।
जब घटनाएं दिन-ब-दिन घटनाएं बढ़ने लगी तो विचलित परिवारजनों ने तर्कशील सोसायटी से संपर्क किया। सोसायटी के सदस्यों ने वहां जाकर जब गहन पूछताछ की तो बात समझते देर ना लगी। सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी और सदस्यों ने इस घटना को एक मानवीय शरारत करार दिया तथा अंधविश्वास निवारण के लिए तर्कशील बनने का आह्वान किया है। चक 10 एन.डी. के इंद्राज, सुनील, कृष्ण, रेंवताराम, रोशन तथा महेन्द्र ने सोसायटी के राममूर्ति स्वामी, विनोद स्वामी, लीलाधर सहू, अजय परलीका, आत्माराम स्वामी, महेन्द्र सिंह, शंकरलाल, संतलाल, रामकुमार तथा दलीप सहू का आभार व्यक्त किया।
-अजय कुमार सोनी और विनोद स्वामी
गत मार्च माह में महेन्द्र की पत्नी की सोने की अंगूठी गायब हो गई। इसे उन्होंने भूल से कहीं रखी मानकर या सामान्य चोरी मानकर संतोष कर लिया। फिर घर पर रखे नगदी रुपए अक्सर कम होने लगे। शाम को अगर पांच हजार रुपए कहीं से लाकर रखते तो सुबह तीन हजार ही मिलते। अगस्त 2010 में अचानक घर में ऐसी घटना हुई कि सारे गांव में चर्चा का विषय बन गया। घर से करीब 9 तोला सोने तथा आधा किलो चांदी के गहने संदूक से गायब हो गए। इस घटना से सभी घरवालों के मन में भय व्याप्त हो गया। पास-पड़ोस, रिश्तेदारों से राय आने लगी कि घर में कोई छाया या ओपरी का प्रभाव है। इसे कोई सयाणे को दिखाओ। इसके बाद वे अलवर के एक सयाणे के पास गए जिसने चार किलो घी जोत के लिए व 20 हजार रुपए मांगे और समस्या के समाधान का जिम्मा लिया। इसी क्रम में झुंझुनू, बींझबायला, पल्लू, रावतसर, लखूवाली इत्यादि दर्जनभर गांवों के झाड़-फूंक, डोरा व तंत्र-मंत्र वालों के चक्कर काटते रहे। वे लोग अपनी-अपनी पूजा-पद्धत्ति व पाखंड से उनसे प्रसाद व जोत के खर्चे के साथ-साथ नगदी तक की मांग करते रहे। किसी ने पड़ोसियों को चोर ठहराया तो किसी ने घर में ही रोग बताया। किसी ने भूत-प्रेत की बाधा तो किसी ने इसे ओपरी का नाम लेकर डर पैदा किया। नोहर के एक पुजारी, ऐलनाबाद के कम्प्यूटर से जंत्री बनाने वाले पंडितजी तथा अबोहर की तांत्रिक औरत द्वारा हिजरायत में अपराधी को दिखाने सहित पल्लू में जोत वाले बाबा ने उनके डर व मानसिक भय को और ज्यादा बढ़ा दिया।
यह सिलसिला रुका नहीं तथा घर में रोज ऐसी घटनाएं होने लगी। घर से रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी गायब होने लगा। ताला-चाबी से लेकर बच्चों के स्कूल बैग व तणी पर सूखते कपड़े गायब होने लगे। पूरा परिवार भय से विचलित हो गया। सयाणों ने सलाह दी कि यह घर छोड़ देने में ही परिवार का भला है। अचानक होने वाली इन घटनाओं के पीछे इस परिवार ने कोई आलौकिक शक्ति का हाथ मान लिया तथा इससे मुक्त होने के लिए पाखंडियों के धक्के चढ़ते रहे।
एक रिश्तेदार ने रामगढ़ की तर्कशील सोसायटी के बारे में बताया तो फोन पर संपर्क कर सारी घटना से सोसायटी को अवगत कराया। दिसंबर माह की 11 तारीख को अन्वेषण शुरू हुआ। सोसायटी के सदस्यों की बातों पर इस परिवार को शुरू में यकीन भी नहीं हुआ। तर्कशील सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी, रामगढ़, गोगामेड़ी तथा परलीका गांव की तर्कशील टीम सदस्यों ने भगवान गांव जाकर पूरी स्थिति का जायजा लिया और इस परिवार को भरोसा दिलाया कि घर के पाखाने की कुंई में सारा सामान मौजूद है। बैटरी की रोशनी से वहां देखा गया तो कपड़े जैसा कुछ दिखाई दिया।
अगले दिन सुबह जब ग्रामीणों ने कुंई का चौका हटाकर सामान निकालना शुरू किया तो मौके पर मौजूद ग्रामीण हैरत में पड़ गए।
ग्रामीणों ने तर्कशील सोसायटी के राममूर्ति स्वामी, महेन्द्र सिंह शेखावत, रामकुमार कस्वां, दलीप सहू, आत्मप्रकाश स्वामी, विनोद स्वामी, लीलूराम व अजय को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
धार्मिक श्रद्धा का नाजायज लाभ
सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी का मानना है कि तांत्रिक व पाखंडी आदि लोग धार्मिक श्रद्धा का नाजायज लाभ उठाते हैं और ऐसे पीडि़त परिवारों को एक-दो चीज डराने वाली दिखाकर अपने प्रभाव में ले लेते हैं। वे जादू का सहारा लेकर आग लगना, नींबू से खून टपकना, रेत की चुटकी से पानी मीठा करना, हाथ में चीजें गायब करना आदि दिखाकर प्रभाव उत्पन्न करते हैं। दूसरी तरफ किसी बड़े लाभ का लालच देकर अपनी लूट का शिकार उन्हें बनाते हैं। इससे पूर्व में भी सोसायटी ऐसी सैकड़ों घटनाओं का समाधान कर चुकी है। बौद्धिक वर्ग अपने चिंतन का उपयोग सामाजिक परिवेश को बदलने में करे तो वह दिन दूर नहीं जब समाज में अंधविश्वास रहित स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा।

भगवान गांव में पाखाने से रुपए व जेवर निकालते समय मौजूद ग्रामीण।
पाखाने से निकले रुपए।


तर्कशील सोसायटी ने किया रहस्योद्घाटन
गायब हुआ धन पाखाने की कुंई में खोज निकाला
विनोद स्वामी व अजय सोनी
विनोद स्वामी व अजय सोनी
घर में बना पाखाना परिवार का गायब हुआ धन उगलने लगा तो देखने वाले हैरान रह गए। घटना हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के भगवान गांव की है। महेन्द्र सिहाग के घर से गत नौ माह से रुपए, जेवर तथा अन्य सामान गायब हो रहा था। जिसे वे दैवीय आपदा या प्रेत-बाधा मानते रहे और झाड़-फूंक वाले सयाणों के चक्कर में पड़े रहे। आखिरकार 16 दिसंबर गुरुवार की रात रामगढ़ की तर्कशील सोसायटी ने रहस्योद्घाटन किया तथा गायब हुआ धन पाखाने की कुंई में खोज निकाला।
सोसायटी ने परिवार के सभी सदस्यों, आस-पड़ोस तथा अन्य संबंधित लोगों से गहन पूछताछ कर हकीकत का पता लगाया और यह रहस्योद्घाटन किया। सोसासटी ने इसे महज मानवीय शरारत माना है तथा शरारती का नाम पूर्णतया गोपनीय रखा गया है। ग्रामीणों की मानें तो इस घटना के बाद उनका जंत्र-मंत्र, डोरा-डांडा व ओझा-सयाणों से विश्वास उठ गया है।
सोसायटी ने परिवार के सभी सदस्यों, आस-पड़ोस तथा अन्य संबंधित लोगों से गहन पूछताछ कर हकीकत का पता लगाया और यह रहस्योद्घाटन किया। सोसासटी ने इसे महज मानवीय शरारत माना है तथा शरारती का नाम पूर्णतया गोपनीय रखा गया है। ग्रामीणों की मानें तो इस घटना के बाद उनका जंत्र-मंत्र, डोरा-डांडा व ओझा-सयाणों से विश्वास उठ गया है।
यूं रहा घटनाक्रम
गत मार्च माह में महेन्द्र की पत्नी की सोने की अंगूठी गायब हो गई। इसे उन्होंने भूल से कहीं रखी मानकर या सामान्य चोरी मानकर संतोष कर लिया। फिर घर पर रखे नगदी रुपए अक्सर कम होने लगे। शाम को अगर पांच हजार रुपए कहीं से लाकर रखते तो सुबह तीन हजार ही मिलते। अगस्त 2010 में अचानक घर में ऐसी घटना हुई कि सारे गांव में चर्चा का विषय बन गया। घर से करीब 9 तोला सोने तथा आधा किलो चांदी के गहने संदूक से गायब हो गए। इस घटना से सभी घरवालों के मन में भय व्याप्त हो गया। पास-पड़ोस, रिश्तेदारों से राय आने लगी कि घर में कोई छाया या ओपरी का प्रभाव है। इसे कोई सयाणे को दिखाओ। इसके बाद वे अलवर के एक सयाणे के पास गए जिसने चार किलो घी जोत के लिए व 20 हजार रुपए मांगे और समस्या के समाधान का जिम्मा लिया। इसी क्रम में झुंझुनू, बींझबायला, पल्लू, रावतसर, लखूवाली इत्यादि दर्जनभर गांवों के झाड़-फूंक, डोरा व तंत्र-मंत्र वालों के चक्कर काटते रहे। वे लोग अपनी-अपनी पूजा-पद्धत्ति व पाखंड से उनसे प्रसाद व जोत के खर्चे के साथ-साथ नगदी तक की मांग करते रहे। किसी ने पड़ोसियों को चोर ठहराया तो किसी ने घर में ही रोग बताया। किसी ने भूत-प्रेत की बाधा तो किसी ने इसे ओपरी का नाम लेकर डर पैदा किया। नोहर के एक पुजारी, ऐलनाबाद के कम्प्यूटर से जंत्री बनाने वाले पंडितजी तथा अबोहर की तांत्रिक औरत द्वारा हिजरायत में अपराधी को दिखाने सहित पल्लू में जोत वाले बाबा ने उनके डर व मानसिक भय को और ज्यादा बढ़ा दिया।
यह सिलसिला रुका नहीं तथा घर में रोज ऐसी घटनाएं होने लगी। घर से रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी गायब होने लगा। ताला-चाबी से लेकर बच्चों के स्कूल बैग व तणी पर सूखते कपड़े गायब होने लगे। पूरा परिवार भय से विचलित हो गया। सयाणों ने सलाह दी कि यह घर छोड़ देने में ही परिवार का भला है। अचानक होने वाली इन घटनाओं के पीछे इस परिवार ने कोई आलौकिक शक्ति का हाथ मान लिया तथा इससे मुक्त होने के लिए पाखंडियों के धक्के चढ़ते रहे।
एक रिश्तेदार ने रामगढ़ की तर्कशील सोसायटी के बारे में बताया तो फोन पर संपर्क कर सारी घटना से सोसायटी को अवगत कराया। दिसंबर माह की 11 तारीख को अन्वेषण शुरू हुआ। सोसायटी के सदस्यों की बातों पर इस परिवार को शुरू में यकीन भी नहीं हुआ। तर्कशील सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी, रामगढ़, गोगामेड़ी तथा परलीका गांव की तर्कशील टीम सदस्यों ने भगवान गांव जाकर पूरी स्थिति का जायजा लिया और इस परिवार को भरोसा दिलाया कि घर के पाखाने की कुंई में सारा सामान मौजूद है। बैटरी की रोशनी से वहां देखा गया तो कपड़े जैसा कुछ दिखाई दिया।
अगले दिन सुबह जब ग्रामीणों ने कुंई का चौका हटाकर सामान निकालना शुरू किया तो मौके पर मौजूद ग्रामीण हैरत में पड़ गए।
ग्रामीणों ने तर्कशील सोसायटी के राममूर्ति स्वामी, महेन्द्र सिंह शेखावत, रामकुमार कस्वां, दलीप सहू, आत्मप्रकाश स्वामी, विनोद स्वामी, लीलूराम व अजय को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
क्यों होती हैं ऐसी घटनाएं
तर्कशील सोसायटी के अनुसार इस प्रकार की घटनाओं के पीछे किसी प्रकार की आलौकिक शक्ति का हाथ नहीं होता वरन सामाजिक समन्वय के अभाव में उपजी खंडित मानसिकता की मानवीय शरारतें होती हैं। भगवान गांव की घटना में भी इसी प्रकार की मानवीय शरारत है। तर्कशील सोसायटी का मानना है कि ऐसी शरारत एक मानवीय भूल होती है, अत: शरारती को सुधरने का मौका मिले तथा वह समाज मेें उचित मान-सम्मान से जी सके इसलिए नाम गोपनीय रखा जाता है।
मतिभ्रम का मनोवैज्ञानिक खेल है हिजरायत
तथाकथित तांत्रिक दर्पण, नाखून या दीपक में उस परिस्थिति या घटना को दर्शाने का दावा करते हैं, जो अक्सर छोटे बच्चों को दिखाई जाती है और यह एक मतिभ्रम का मनोवैज्ञानिक खेल है। इसका सहारा लेकर पाखंडी लोग लोगों को मूर्ख बनाते हैं। इसमें लेशमात्र भी सच्चाई नहीं होती है। दर्पण, कालिख लगे नाखून या दीपक की जोत में एकटक बिना पलक झपके देखते हैं तो शुरू मे जो वस्तु सामने होती है वही दिखाई देती है, पर लगातार एक ही तरफ देखने से ऑप्टिक नर्व थक जाती है और उसमें सुन्न होने लगती है और दिमाग को वह पहले जो संदेश दे रही होती है वह नहीं दे पाती। बल्कि बालक के अचेतन में ऐसा संदेश एक रील की भांति पहले से ही चलता रहता है जो उसने पहले सुन रखा हो। फलस्वरूप उसे वही घटना दिखती प्रतीत होने लगती है।
धार्मिक श्रद्धा का नाजायज लाभ
सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी का मानना है कि तांत्रिक व पाखंडी आदि लोग धार्मिक श्रद्धा का नाजायज लाभ उठाते हैं और ऐसे पीडि़त परिवारों को एक-दो चीज डराने वाली दिखाकर अपने प्रभाव में ले लेते हैं। वे जादू का सहारा लेकर आग लगना, नींबू से खून टपकना, रेत की चुटकी से पानी मीठा करना, हाथ में चीजें गायब करना आदि दिखाकर प्रभाव उत्पन्न करते हैं। दूसरी तरफ किसी बड़े लाभ का लालच देकर अपनी लूट का शिकार उन्हें बनाते हैं। इससे पूर्व में भी सोसायटी ऐसी सैकड़ों घटनाओं का समाधान कर चुकी है। बौद्धिक वर्ग अपने चिंतन का उपयोग सामाजिक परिवेश को बदलने में करे तो वह दिन दूर नहीं जब समाज में अंधविश्वास रहित स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा।
प्रतिबंध लगे पाखंडियों पर
''पांखडियों का जाल दिनोदिन बढ़ता जा रहा है और इन पर कोई अंकुश नहीं है। सरकार को चाहिए कि इन पर प्रतिबंध लगाया जाए और कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।'' -साहबराम सिहाग, ग्रामीण, भगवान।
पाखाने से निकले सोने-चांदी के जेवर।
तर्कशील टीम के साथ परिवार के लोग व ग्रामीण।
अंधविश्वास की आग बुझाई तर्कशील सोसायटी ने
बैठे-बैठे अचानक कपड़े जल जाएं। ऐसा दिन में कई बार और रोज-रोज हो तो जी हां, इसे आप देवीय शक्ति, श्राप, प्रेतबाधा या ओपरी का प्रकोप ही समझेंगे, पर तर्कशील सोसायटी इसे महज मानवीय शरारत करार देती है और देखते ही देखते समस्या का समाधान निकल आता है।
श्रीगंगानगर जिले का छोटा सा चक जहां पर एक परिवार का 20 वर्षीय युवक राजू अपने कपड़ों में अचानक आग लगने से गत जनवरी माह से परेशान था। राजू के बड़े भाई राजेश ने बताया कि उसके घर में उसकी पत्नी, मां व छोटा भाई राजू रहते हैं। वह मकान बनाने का और राजू वैल्डिंग की दुकान पर काम करता है। करीब ड़ेढ वर्ष पहले से उनके घर में रखे रुपए कम होने लगे। घर के सदस्यों को भी एक दूसरे पर शक होने लगा, मगर विश्वास भी इतना था कि शक करना उचित न जान पड़ता था। कहीं से पांच हजार रुपए लाकर रखते तो कभी हजार तो कभी दो हजार रुपए कम हो जाते। उन्होंने स्थानीय स्याणों व ओझाओं को इस बारे में बताया तो उनमें से किसी ने माताजी का जागरण लगाने तो किसी ने घर में धूप-ध्यावना करवाने की सलाह दी।
एक दिन छोटा भाई राजू चाय की दुकान से चाय लेकर वापिस आया तो उसके कुर्ते का पीछे का हिस्सा जल गया। फिर तो रोज-रोज उसके कपड़ों में आग लग जाती। एक दिन खूंटी पर टंगी उसकी स्वेटर में आग लग गई तो दूसरे दिन तार पर टंगी चद्दर में, जुराबों में आग लगना तो रोज का काम हो गया। शुरू-शुरू में तो इस बात को गंभीरता से नहीं लिया। सोचा कि वैल्डिंग का काम करता है तो जुराबें जल जाती होंगी, पर धीरे-धीरे उसके पहने कपड़ों में और फिर खूंटी पर टंगे कपड़ों में आग लगनी शुरू हो गई।
इन घटनाओं से तंग आकर उन्होंने रामगढ़ व परलीका की तर्कशील सोसायटी के सदस्यों से संपर्क किया तो उन्होंने समस्या का समाधान कर दिया। सोसायटी के प्रांतीय प्रतिनिधि राममूर्ति स्वामी, दलीप सहू, ओमप्रकाश खाती, लीलूराम, विनोद स्वामी व अजय परलीका ने इस परिवार के पास जाकर गहन पूछताछ की तो बात समझते देर न लगी। सोसायटी के द्वारा किए गए समाधान के बाद घर में इस प्रकार की घटनाएं होनी बंद हो गई।
राममूर्ति स्वामी ने बताया कि इस तरह की घटना का मूल कारण सामाजिक समन्वय नहीं होना है। इससे रोगी की मानसिकता खंडित हो जाती है। जिससे पाखंडी लोग लोगों के मन में वहम भर देते हैं और पीड़ित ठगा जाता है।
श्रीमान कृपया अपना ईमेल एड्रेस देवें जिससे मैं आपको ज्योतिष विद्या के विषय में अनेक तथ्य भेज सकूॅ। जो लोग ज्योतिष / हस्त रेखा '' विज्ञानीयों ''के चंंगुल में फंसेे हुए हैं, उन्हें इस ठग विद्या की असलियत मालुम चल जायेगी
ReplyDeleteक्या आप जानते है की ग्राहक ज्योतिषियों के विरुद्ध निम्न कानूनी कार्रवाही कर चालाक ज्योतिषियों द्वारा की जाने वाली ठगी से अपने को बचा सकते है -
ReplyDelete१ - ज्योतिषियों द्वारा की बताई गयी भविष्यवाणी गलत निकलने पर अथवा किसी घटना को रोकने / होने के लिए उनके द्वारा सुझाये गए उपाय, टोटके (रत्न, वास्तु) आदि का अनुकूल परिणाम नहीं निकलने पर, Indian Consumer Act के अंतर्गत उनके विरुद्ध दावा किया जा कर हर्जाना वसूल किया जा सकता है -
२ - ज्योतिषियों द्वारा किसी भी तरह की डरावनी अफवाह फैलाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 505(1)(b) के अंतर्गत उनके विरुद्ध 3 वर्ष तक की जेल के लिए दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है -
३ - ज्योतिषियों द्वारा किसी भी तरह की धोखाधड़ी करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अंतर्गत उनके विरुद्ध 7 वर्ष तक की जेल के लिए दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है उपरोक्तानुसार कार्रवाही करने के लिए आपको निम्न कार्रवाही भी करना पड़ेगी- १ - भविष्य वाणी, उपाय आदि ज्योतिषी के छपे हुए नाम वाले कागज़ पर लिखित में लें २ - इसी कागज़ पर आप के नाम सहित कुंडली बनी होत था प्रत्येक भविष्यवाणी/उपाय के लिए निश्चित समय/माह भी बताया गया हो -
३ - सुनिश्चित कर ले की ज्योतिषी बाद में गलत जन्म समय आदि की आड़ में बचने की कोशिस नहीं करे इसलिए ज्योतिषी से यह भी लिखवा लें की उसने अपने तरीके से यह सुनिश्चित कर लिया है की जन्म समय आदि सही हैं -
४ - किये गए भुगतान की रसीद ले जिसमे आप का नाम, पता, दिनांक, राशि, ज्योतिषी का नाम आदि हो
- ५ - भूतकाल की सही बताई गयी घटनाओ से प्रभावित नहीं हो
6 - गोल-मोल और चरित्र पर सामान्य भविष्यवाणी के बजाय किसी बिन्दु पर निश्चित भविष्यवाणी करवाये -
७ - अपने मोबाइल पर उनके विज्ञापन के बोर्ड, कमरा, परिचय पत्र, अन्य विज्ञापन जिसमे उसने अपनी सफलता के दावे किये हो, उनके फोटो खींच ले
- ८ - अपने मोबाइल पर की गयी चर्चा भी रिकॉर्ड कर सकते है -
९ - यह भी सुनिश्चित कर ले की कही भी ज्योतिषी ने अपने दावे छोड़ने की कोई टिप-hint नहीं दे रखी हो और उपरोक्त बिंदुओं पर रिकॉर्ड रखने से मना नहीं करे - और यदि वह ऐसा करता है तो समझ ले की आपको ठगा जा रहा है -
१० - ज्योतिषी के पास अपने मित्र के साथ जाए जो आपकी तरफ से गवाही दे सके -
११ - आवश्यक क़ानूनी साक्ष्य और कार्रवाही के लिए अपने वकील के संपर्क में रहे - ध्यान दे की आपकी थोड़ी सी सावधानी न सिर्फ आपके हजारों - लाखों रुपये बचा सकता है वरन आपका जीवन भी बचा सकता है.